⭐ रेटिंग: ⭐⭐ (2/5)
निर्देशक आदित्य धर की नई फिल्म ‘धुरंधर’, जो कराची के कुख्यात ल्यारी इलाके पर आधारित एक इंटेलिजेंस मिशन का चित्रण पेश करती है, एक भव्य स्केल पर शुरू होती है लेकिन उतनी ही तेजी से भटक भी जाती है।
आदित्य धर, जिन्होंने उरी और Article370 जैसी राजनीतिक-एक्शन फिल्मों में अपनी पकड़ दिखाई थी, इस बार भी बड़े कैनवास पर एक बायोपिक-स्टाइल अंडरवर्ल्ड ड्रामा पेश करने की कोशिश करते हैं—लेकिन कहानी और एडिटिंग की कमज़ोरियां इस फिल्म को भारी बना देती हैं।
🎬 कहानी: कराची का अंडरवर्ल्ड, लेकिन अधूरी पकड़
‘धुरंधर’ की शुरुआत इतनी दमदार होती है कि यह फिल्म कराची के ‘सत्या’ का एहसास कराती है।
अंडरवर्ल्ड गैंग्स, राजनीतिक जोड़तोड़, और सीक्रेट इंटेलिजेंस ऑपरेशन—सब कुछ मौजूद है।
लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, कहानी कराची के असली माहौल से दूर होती जाती है। शहर को एक सेपिया टोन वाले थर्ड-वल्र्ड स्टीरियोटाइप की तरह दिखाया गया है—जैसे कुछ हॉलीवुड फिल्मों में दक्षिण एशिया को गलत तरीके से पेश किया जाता है।
⭐ कलाकारों का प्रदर्शन: अक्षय खन्ना ने फिर बाज़ी मारी
जहां कहानी कई जगह कमजोर पड़ती है, वहीं अक्षय खन्ना पूरी फिल्म का दिल बनकर उभरते हैं।
उनका किरदार—जो वास्तविक कराची गैंगस्टर रहमान डकैत से प्रेरित है—तीक्ष्ण, रहस्यमय और बेहद प्रभावशाली है।
हर सीन में वह अपनी स्क्रीन उपस्थिति से शो चुरा लेते हैं।
रणवीर सिंह, हालांकि हर फ्रेम में बड़े और पावरफुल दिखते हैं, लेकिन उनके किरदार में गहराई की कमी है।
न कोई मजबूत बैकस्टोरी, न कोई दमदार इमोशनल आर्क—वह एक मशीन की तरह सिर्फ एक्शन करते दिखाई देते हैं।
🔫 एक्शन और स्टाइल: ज्यादा लंबाई, कम पकड़
फिल्म की लंबाई इसका सबसे बड़ा दुश्मन है।
साढ़े तीन घंटे का रनटाइम इसे थका देने वाला अनुभव बनाता है।
रणवीर के एक्शन सीक्वेंस जरूर स्टाइलिश हैं—कभी रेम्बो-स्टाइल, कभी देसी जेम्स बॉन्ड—लेकिन कहानी की कमजोरी उन दृश्यों से जुड़ने नहीं देती।
26/11 की कराची लिंक वाली कहानी भी बिना गहराई के पेश की गई है, जिससे भावनात्मक स्तर पर दर्शक कनेक्ट नहीं कर पाते।
📉 स्क्रिप्ट और निर्देशन: बड़ा विज़न, लेकिन कमजोर निष्कर्ष
आदित्य धर की सबसे बड़ी ताकत—रिसर्च और पॉलिटिकल/मिलिट्री बैकड्रॉप—यहां आधी-अधूरी नजर आती है।
फिल्म में मौजूद असली अंडरवर्ल्ड फिगर्स से प्रेरित किरदारों की कहानी अगर और विस्तार में दिखाई जाती, तो यह फिल्म एक शानदार क्राइम ड्रामा बन सकती थी।
🎯 कुल मिलाकर: धुरंधर में दम था, लेकिन दिशा खो दी
‘धुरंधर’ में कहानी, किरदार और बैकड्रॉप का पावरफुल कॉम्बिनेशन बनने की पूरी संभावना थी।
अक्षय खन्ना का शानदार अभिनय और कुछ बेहतरीन सेट पीसेज़ फिल्म को खींचते जरूर हैं, लेकिन कमजोर लेखन, ओवर-द-टॉप एक्शन और लंबे रनटाइम के कारण फिल्म असर नहीं छोड़ पाती।
फिल्म सिर्फ एक बार देखने लायक — वो भी अक्षय खन्ना के लिए।
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