🌟 DDLJ के 30 साल पूरे — लंदन ने दी ऐतिहासिक श्रद्धांजलि
बॉलीवुड की सबसे प्रिय रोमांटिक फिल्म
‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (DDLJ) ने अक्टूबर में अपनी
30वीं वर्षगांठ पूरी कर ली। तीन दशक बाद भी इस फिल्म का जादू उतना ही असरदार है, और इसी जादू को सम्मान देते हुए लंदन में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।
पहली बार किसी भारतीय फिल्म के मुख्य किरदारों को लंदन के
लीसेस्टर स्क्वायर जैसे प्रतिष्ठित स्थान पर प्रतिमा के रूप में स्थान मिला है। राज और सिमरन की यह कांस्य प्रतिमा DDLJ की वैश्विक लोकप्रियता का प्रतीक बन चुकी है।
🎥 शाहरुख–काजोल की मौजूदगी ने पल को बनाया खास
राज–सिमरन की प्रतिमा का अनावरण खुद
शाहरुख खान और
काजोल की उपस्थिति में किया गया।
स्काई ब्लू साड़ी में काजोल और क्लासिक ब्लैक सूट में SRK — दोनों सितारे बिल्कुल फिल्मी अंदाज़ में अपनी ही प्रतिमा के सामने पोज़ देते नजर आए।
इस अनोखे पल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रहे हैं।
💬 शाहरुख खान बोले: “बड़े देशों में ऐसी छोटी-छोटी चीजें होती रहती हैं, सेनोरिटा!”
शाहरुख ने प्रतिमा अनावरण के दौरान अपने प्रसिद्ध डायलॉग के अंदाज़ में कहा:
“लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में DDLJ के 30 साल पूरे होने का जश्न मनाते हुए राज और सिमरन की कांस्य प्रतिमा का अनावरण करना मेरे लिए बेहद खास है। यह पहली भारतीय फिल्म है जिसे ‘सीन्स इन द स्क्वायर’ ट्रेल पर स्थान मिला है। अगर आप लंदन में हैं तो राज और सिमरन से ज़रूर मिलें।”
🌍 ग्लोबल लेवल पर DDLJ का अविश्वसनीय प्रभाव
DDLJ सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्यार और रोमांस की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है।
फिल्म —
✔
“1001 Movies You Must See Before You Die” में शामिल तीन हिंदी फिल्मों में से एक है।
✔ ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट की
ऑल-टाइम ग्रेटेस्ट इंडियन फिल्म्स की सूची में 12वें स्थान पर है।
✔ 2012 में बीएफआई की
1,000 महानतम फिल्मों की सूची में भी शामिल की गई।
30 साल बाद भी DDLJ की प्रासंगिकता बताती है कि रोमांस और भावनाओं की यह कहानी अब भी दर्शकों के दिलों में बसती है।
🎬 आदित्य चोपड़ा की पहली फिल्म — 3 साल की मेहनत का नतीजा
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, निर्देशक
आदित्य चोपड़ा की पहली फिल्म थी।
उन्होंने इसे अपने पिता
यश चोपड़ा को दिखाने से पहले लगभग
तीन साल तक इसकी स्क्रिप्ट पर काम किया।
शुरुआत में इस कहानी को लेकर संशय था—ना परिवार को विश्वास था, ना ही फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों को।
लेकिन आदित्य अपने विज़न पर डटे रहे, और नतीजा आज हमारे सामने है—भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी रोमांटिक फिल्मों में से एक।
DDLJ का 30 साल बाद भी इसी तरह सम्मान मिलना बताता है कि
राज और सिमरन सिर्फ किरदार नहीं, बल्कि एक युग हैं।
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